बुधवार, 3 अगस्त 2016

विकसित सभ्यता

असल में ये माना जा चुका है की
दुनिया में सभ्यताएं अलग अलग चरणों में है
और परिपक्व हैं।
सबसे सभ्य होने वाले सरदार बन बैठे हैं।
सभ्यता  के पायदान पर सबसे आगे वाले और उनके पिछलग्गू दोनों में होड़ है
के तुम महान हो और हम भी बस तुम्हारे आस पास ही हैं

लेकिन ढोर चराने वाले और कच्चा मांस खाने वाले
अब तक इस धरती पर बोझ माने जाने लगे हैं
हरामी रण्डी मादरचोद से भी नीचे जाकर शब्दो की खोज शुरू हुई है
कोई तो शीर्षक देना पडेगा इन इंसानों की खाल में इन पिछड़े जंगलियों को।

असल में ये माना जा चुका है की सभ्यता के विकास की ये अंतिम स्थली थी
बस अब यही रहेगी
बस अब इसे ही भोगो

और ये तब तक होगा
जब तक कोई और अरबो साल अगड़े विकसित गोले के लोग
अपने आसमानी सैर सपाटे के दौरान
हमें कीड़े मकोड़ो की तरह कुचल कर
आगे ना बढ़ जाए

असल में धरती की इन विकसित सभ्यताओं को तब शायद ये एहसास हो जाएगा
की वो अब भी जंगली अवस्था में ही थे।
मार्क्सवाद के अंतिम सूत्र शायद तब भी लिखे जाएंगे।

रविवार, 31 जनवरी 2016

तानाशाह

तानाशाह असल में तानाशाह नहीं होते
वो सर्वोच्च अथॉरिटी नहीं होते।
तानाशाह भी पाले जातें है , उनके भी मालिक होते हैं। 
तानाशाह देखा जाए तो पालतू कुत्ते होते हैं
एक बंधुआ नौकर की तरह

तानाशाह सवालो का जवाब नहीं देते
वो सवालो का जवाब दे भी नहीं सकते
उन्हें मालिको के लिए नीतियां लागू करवानी होती हैं।
इसके विरोध में जो भी आवाज उठाये उसे दबाना होता हैं
इसलिए उन्हें सिर्फ भौकने और काटने का आदेश होता है।

तानाशाह अक्सर अपने सर में गोली मार लेते हैं
या अंत में जनता उन्हें सड़को पर घसीट के मारती हैं
बिलकुल कुत्ते की मौत मरते हैं वो।

बुधवार, 29 जुलाई 2015

मास्टर ऑफ़ पपेट्स

ये अपनी चालो में पूरी तरह से कामयाब जा रहा है ,
हम इसकी हर चाल में फंस रहे है।
हम का मतलब सिर्फ विरोधी ही नहीं।
इसके भक्त भी इसकी हर चाल में फंस रहे है।
ये दोनों को नचा रहा है।

आवाम को उलझा कर मुल्क को बेचने का हुनर है इसके पास
तभी तो इसे चुना गया है।
आँखे खोलो। ……दिमाग खोलो।
और अगली चाल का इन्तेजार करो
इसका हर गेम , हर चाल ..

मुल्क की तिज़ारत पर खामोशी से पर्दा डाल रहा है।
चाल को समझो
या फिर अपनी साम्प्रदायिक कुंठा के चरमोत्कर्ष स्खलन का मजा लेते रहो
देश बर्बादी की और दौड़ रहा है.



रविवार, 30 नवंबर 2014

बच्चे


बच्चे सर्दियों की धुप की तरह होते है
बच्चो को अच्छे से महसूस करना जरूरी है
बच्चो को  प्यार करना जरूरी है
हो सकता है की आपका बच्चा
पढ़ाई लिखाई या किसी कला में बहुत तेज हो
हो सकता है की वो इन सबमे साधारण हो
हो सकता है की आपका बच्चा इनमे से कुछ भी अच्छा ना करता हो
बच्चो से किसी भी अच्छे या  साधारण की उम्मीद , या खराब करने का डर मत पालो 
किसी भी पढ़ाई , खेलकूद या कला में निपुण हो जाने को प्यार का पैमाना मत बनाना
बच्चो को प्यार देने की हर शर्त , बेशर्त होनी चाहिए !



बुधवार, 12 नवंबर 2014

चालू माल

 (सआदत हसन "मंटो" को समर्पित )
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>> भैय्या एक बेन्सन लाइट सिगरेट का पैक देना
सिगरेट लेकर वो वापस ऑटो की तरफ बढ़ी

पास में दो लड़के सिगरेट पी रहे थे
उसे देख  कर वो दोनों  मुस्कुराये
एक ने आँख मार के बोला। ।

"चालू माल है बेटे "

सोमवार, 21 अप्रैल 2014

सकल ताड़ना के अधिकारी

गुजरात में सात दिन पहले हेलोदर गाँव में सरेआम चौराहे पर ज़िंदा जला दी गयी दलित महिला के नाम *****************************



बिना जाने समझे
अब तक तुमने मेरे बारे में अपनी राय बना ली होगी।
जैसे बनायी थी एक सफ़ेद चलती बस में इज्जत लुटती उस लड़की के लिए।
चालू थी , वर्ना इतनी रात में क्या कर रही थी अकेले लड़के के साथ ?

इसी तरह। अब  चाहो तो तुम मेरे बारे में भी अपनी राय बना सकते हो .
हो न हो ये दलित औरत भी शर्तिया ही ....  रही  होगी कोई छिनाल, रण्डी ,चालू ,मुँहजोर ?
या कुछ और नाम दे दो , जो भी तुम लोगो ने सीखा है अपनी महान संस्कृति से.
लेकिन भूलना मत ...
व्यवस्था, जात और रवायतों की तीन तीन परतों  में लिपटे ..
औरत के शोषण से भरे ग्रंथो के सूत्रों की जब बखियां उघेड़ी जाएंगी।
उस दिन तुम्हारी वर्णव्यवस्था के मर्दवादी होने की पोल भी खुल के रहेगी।
क्योंकि बख्शा तो तुमने सीता को भी नहीं था।

बुधवार, 9 अप्रैल 2014

रहनुमा

 ज्यादा इतराओ मत , ज्यादा खुश मत होओ।
ये जो छदम विकास कि गपोड़ कथाओ पर तुम इठला रहे हो
इनकी असलियत तुम भी जानते हो। .

तुम्हारी इस शालीनता के पीछे छिपे
जो नफरत के समंदर  उछल रहे है
वो साफ़ साफ़ दिखते है

एक मज़हबी नफ़रत का ज़हर जो तुम्हारे दिमाग में है
उसको पनाह देने वाला रहनुमा आज उफान पर है
तुम उसके दम पर ही कूदते हो ना ?

लेकिन तुम भूल रहे हो। .
वो रहनुमा नहीं सिर्फ एक पालतू कुत्ता है। 
और उसके मालिको को सिर्फ मुनाफ़ा दिखता है।

उस मुनाफे में जब कमी आएगी तो वो पहला धक्का तुम्हारे रहनुमा को मारेंगे
और फिर तुम्हारी रगो में बहते लहू को निचोड़ कर अपना मुनाफा खींच लेंगे
बिना ये जाने के तुम हिन्दुआन हो या मुल्ले!

उस दिन तुम्हारा रहनुमा अपनी बेरोजगारी पर आंसू बहा रहा होगा।