गुरुवार, 29 नवंबर 2012

बाला साहेब


किसी की भी मौत के बाद उसके बारे में बुरा बोलना गलत होता है,,,,,
लेकिन  आप जब किसी की विवेचना करते है तो उसकी तुलना दूसरो के गलत कामो से करके आप उसके गलत कामो को नहीं छुपा सकते ...
आप वीरप्पन, प्रभाकरन ,दाउद , और ना जाने कितने लोगो की जिंदगी पढ़ कर देख लीजिये ,,,वो सब के सब प्रत्यक्श या अप्रत्क्यक्ष रूप से कोई न कोई भलाई का काम करते थे,,,,यहाँ तक की कल ही मरा पोंटि चड्ढा भी 1000 गरीब परिवारों को पालता था, वो हमारे ही इलाके से आता है,,,,और उसके पूरे खानदान की कर्तुते हम जानते है,,,

बाला साहेब के किये गए अच्छे कामो को आप इस कसौटी पर देखिये की उन्होंने सम्पूर्ण भारतीय मानव समाज में किस विचारधारा को पनपाया ,,,,,और उससे किसका भला होने वाला है,,,,उसने किस देशी या विदेशी पूंजीपति को भारत के संसाधनों की लूट के लिए रोका,,,,,,जो की इस मुल्क की गरीबी का में कारण है,,,
मुसलमानों को तो छोडिये यहाँ तक की उन्होंने हिन्दुओ को भी जात पात और क्षेत्र के नाम पर बांटने में कोई कसर नहीं छोड़ी .यहाँ तक की अपने अंतिम भाषण में भी उन्होंने सिर्फ मराठी राग ही अलापा ,,,उन्हें असल में इस देश से कुछ लेना देना ही नहीं था,,वो सिर्फ मराठी राजनीती करके अपना घर चलाते थे,,,और इसे जस्टिफाई करने के लिए देशभक्ति के रूप में पकिस्तान और मुसलमानों का विरोध करते थे ,,जो की एक बहुत ही संवेदन शील विषय है और एक आम आदमी जिसे राजनीती की समझ नहीं है वो इस झांसे में आसानी से आ जाता है।विरासत के रूप में भी उन्होंने अपने 3 बच्चो को समाज में येही जहर घोलने की शिक्षा देकर ही छोड़ा है,

देशभक्ति का मतलब असल में देश की जनता की भक्ति , उनका सामान और उनके संघर्ष में हिस्सेदारी होता है,,,ना की एक वर्ग विशेष के लोगो की भावनाओं को भड़का कर अपनी राजनितिक रोटी सेकना,,,,,,,,,अगर येही देशसेवा है तो फिर मुलायम सिंह , मायावती और बाबूसिंह कुशवाहा भी देशभक्त है,,,,

अंत में बस येही कहूँगा की उनकी बेबाकी और कला प्रतिभा अतुलनीय थी ,,,,लेकिन यदि आप उसे देशभक्ति, समाजसेवा या वर्ग संघर्ष के योद्धा के रूप में देखते है,,,तो Please Count me Out

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