गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

नास्तिक वो बला है..





















नास्तिक वो बला है जो चिल्लाता है की मैं नास्तिक हूँ . क्योंकि वो सच्चे अर्थो में नास्तिक है।  
वो कर्म करता है , और फल की इच्छा में कर्म करता है,  क्योंकि वो जानता है की उसके  " श्रम " में वो ताकत है जो उसे परिणाम देगी , वो इतिहास से प्रेरणा लेता है , वो विज्ञान पर विश्वास करता है , वो सवाल करने की हिम्मत रखता है ,वो गलत बात के लिए अपने शिक्षको और अपने बॉस से भी तर्क कर लेता है , वो समाज के मनोविज्ञान को समझता है , वो लोगो के मनोविज्ञान को समझता है , तभी वो अपने विरोधियो से भी प्यार करता है ,अपनी गलती मानने की हिम्मत रखता है, दूसरो की गलती को गलत सिद्ध करने की तार्किक क्षमता रखता है . वो अपने शरीर को समझता है , वो जनता है की शरीर की जैव रासायनिक क्रिया ख़तम होने पर वो मर जाएगा, वो किसी पुनर्जनम को नहीं मानता ,उसे पता होता है की उसे सिर्फ एक जीवन मिला है जीने के लिए . उसके मरने के बाद कुछ नहीं होगा उसके लिए .वो स्वर्ग और नरक इसी दुनिया में देखता है , वो धर्म के सिद्धांतो को अपने तर्कों से ठोकरों पर उडाता है , वो धरम ग्रंथो को मक्कार, हरामखोरो, सत्ता के दलालों ,चाटुकारों, जनता को ठगने ,शोषण करने वालो द्वारा रचित झूठ के पुलिंदे भर मानता है !  धार्मिक लोग गलत काम करते है और फिर भगवान् के सामने चढ़ावे और यात्राओं के जरिये उनकी माफ़ी मांगते है . नास्तिक को ये सुविधाए प्राप्त नहीं है , वो जानता है की उसके गलत कामो को कोई क्षमा करने वाला नहीं है , इसलिए वो गलत काम नहीं करता, और गलति करता भी है तो उसे सुधारने का जतन करता है। वो अपनी गलतिया मानने की हिम्मत रखता है वो अपने छोटो से भी माफ़ी माँगता है , और वो अच्छा ,अच्छा और अच्छा बनता चला जाता है। वो दिमागी रूप से जाग्रत होता है वो अगर 20 साल तक किसी को तहे दिल से माने ,और अगर वो गलत काम कर दे तो, वो उसका विरोध करने की भी ताकत रखता है !वो जानता है की वो अपने माता पिता  से पैदा है और उसकी संताने उससे पैदा हुई है वो मानव विकास के क्रम  को समझता है . इसलिए वो सबसे मोहब्बत करता है . वो जीने का भरपूर मजा लेता है , वो जानता है की दुनिया में हर चीज मानव ने ही बनायी है , वो जानता है की ये दुनिया अपने आप बनी है , वो जानता है की पूरी श्रष्टि , ब्रह्माण्ड और दुनिया अपने आप को चलाने में खुद सक्षम है उसे पता होता है की जिन सवालों का जवाब उसके पास नहीं है उन सवालों का जवाब भविष्य की आने वाली नसले खोज लेंगी . वो अनसुलझे सवालों का जवाब भगवान् की सत्ता में नहीं खोजता। वो भगवान् की सत्ता को खारिज करता है। वो चिल्लाता है की अगर दम है तो भगवान् मेरा कुछ बिगाड़ के दिखाए .वो अपने दुखो और परेशानियों के कारण खुद खोज कर उन्हें हल करता है . वो परिवर्तन से नहीं घबराता , वो आँख मूँद कर किसी सिद्धांत पर यकीन नहीं करता , वो उसका अध्यन करके उसको परखता है .वो  अपने आपको असीम संभावनाओं से भरा मानता है वो लिखने की कोशिश करता है , वो कविता कहने की कोशिश करता है. वो नाचता है वो गाता है ! वो मानव समाज की असीम शक्ति और उत्पादन क्षमता को जानता है , उसे विरोधी शक्तियों की समझ होती है, वो इससे निकलने के उपाय जानता है , इसलिए वो हर शोषण कारी शक्ति के खिलाफ बगावत करता है , अपनी क्षमता के हिसाब से वो सामजिक बदलाव के लिए प्रयास करता है , वो पढता है , समझता है फिर सोचता है, वो अंधभक्ति नहीं करता। वो जानता है की ये दुनिया उसके लिए है , उसके माँ बाप और उसके बच्चो  के लिए है उसके दोस्तों के लिए है हर इंसान के लिये है ,हर मजदूर के लिए है ,वो किसी जमीन के टुकड़े को देश नहीं मानता, वो जनता को देश मानता है ,वो अपने देश से प्यार करता है वो दुसरे देश से प्यार करता है वो हर देश के लोगो को अपना भाई मानता है वो कोई रंग , नस्ल,जाती, धर्म ,सम्प्रदाय को नहीं मानता ,वो सिर्फ इंसान को मानता है .वो जानता है की उसकी म्रत्यु कभी भी हो सकती है , वो अपने लिए जीने के तरीके खोजता है. वो किसी मोक्ष और निर्वाण को नहीं मानता , वो अच्छे इंसान के रूप में ढलने को ही मोक्ष मानता है वो शोषण के खिलाफ जनता के संघर्ष को ही जीवन यात्रा मानता है .वो ज्योतिष, अरदास, नमाज,पूजा, पाठ, छुआछुत, कर्मकांड, धार्मिक गुरु , पंडो , पादरियों , मुल्लो, पीर, फ़कीर ,मजार मंदिर,मस्जिद ,गिरिजा,   और उनके चमत्कारों पर हंसता है ,वो इनसे चंगुल से बचने के लिए लोगो को समझाता है ..वो अपनी नास्तिकता पर गर्व करता है ,
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(विनोद हौंसलेवाला "बाग़ी " को समर्पित )

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