मंगलवार, 29 जनवरी 2013

मेरी लघु कहानियाँ - मंटो को समर्पित


दिल को झकझोंर देने वाली लघु  कहानियों के बेताज बादशाह ...सआदत हसन मंटो को समर्पित 



मेरी लघु कहानियाँ 
 (कहानियो में घटनाएं और चरित्रों के नाम काल्पनिक है,,,,किसी से इनका मेल खाना मात्र एक इत्तेफाक होगा - लेखक जिम्मेदार नहीं है  )


{ एक }

काला कुत्ता  -

दादी को एक ज्योतिषी ने बताया की 11 दिन तक काले कुत्ते को लड्डू खिलाओ तो शनि का प्रभाव कम होगा ,
दादी मुझे पूजा का लड्डू देकर गली में काले कुत्ते को खोज कर उसे खिलने के लिए देती है,
और मैं अगली गली में जाकर नुक्कड़ की दूकान से बड़ी गोल्ड फ्लेक लेकर पीने लगता हूँ .

फिर पन्नी से लड्डू  निकाल  कर खाता हूँ,,
सॉरी  काले कुत्ते ,,,,,,,,,,,,,,सिगरेट के बाद माउथ फ्रेशनर भी जरुरी होता है न .

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{ दो }

गन्दगी -

त्रिपाठी और शुक्ला जी डीटीसी से ऑफिस जा रहे थे , तभी लक्ष्मी नगर से कुछ मुसलमान बस में चढ़े ,,,,,
शुक्ल टू  त्रिपाठी - यार त्रिपाठी जी ये साले मुल्ले इतने गंदे क्यों रहते है यार.
त्रिपाठी - हां शुक्ला जी हमेशा गन्दगी फैलाते रहते है साले.
बस ITO  फ्लाई ओवर पर पहुंची !
अरे त्रिपाठी जी ,,यार खिड़की तो खोलो ज़रा, कल घर में पूजा थी, पूजा का सामान और हवन की राख यमुना नदी में फेंकनी है .
शुक्ल जी ने पूरी ताकत से पॉली थीन में भरी राख यमुना में उछाल दी, आधी राख  सड़क पर गिरी और बाकी यमुना में .
शुक्ला त्रिपाठी और पास बैठे दो चार और लोगो ने हाथ जोड़ कर बोला . "जय यमुना मैय्या" .

बस के साथ साथ चलते साइड में एक बाइक वाले के कपड़ो पर राख गिर गयी ! वो बाइक साइड में रोक कर राख साफ़ करता हुआ बोल रहा था
""सारे कपडे खराब कर दिए भो * ड़ी वाले ने .""
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{ तीन }

रिवोल्युसन -

यार आजा ना
""नहीं यार आज नहीं,,,बहुत काम है""
अबे आजा ना यार,,,बहाने मत बना
"" यार मुश्किल है,,""
अबे आजा न,, बड़े सॉलिड सॉलिड माल आयेंगे ..कसम से
""ओके चल एक घंटे में मिलता हूँ ..""
ओके .

मम्मी मैं जा रहा हूँ।
""आज सन्डे को सुबह सुबह कहा जा रहे हो ..""
मम्मी "अन्ना " की रैली में रामलीला मैदान जा रहा हूँ ..
ठीक है ...ध्यान से रहना ...
""ओके बाय ......अतुल का कॉल आये तो बोल देना मैं निकल गया ...""

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{ चार }

इमोशनल अत्याचार -

इमोशनल अत्याचार का आखिरी सीन चल रहा था ..
प्रेमी ने अपनी प्रेमिका को रंगे  हाथो दुसरे लड़के के साथ पकड़ लिया,
आखिरी लड़ाई चल रही थी ..

मैं और मेरा दोस्त टीवी पर देख रहे थे .
दोस्त बोल  "हा हा हा हा ,,ये आजकल की लडकिया साली बहुत हराम होती हैं  ""
लास्ट में प्रेमी मुसलमान निकला और लड़की हिन्दू।।।

मेरा दोस्त बोला  -  "स्स्स्साला कटुआ ..............हिन्दू लड़की पटाता है ...मादर**"

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{ पांच }

फेसबुक डिस्कसन बोर्ड -

जयेश पटेल - जय मोदी राज, भारत माता की जय
शशांक मिश्रा - जय हिन्द , जय मोदी राज
अफ़रोज आलम  - मोदी जी ने अच्छा विकास किया है लेकिन मोदी जी को माफ़ी मांगनी चाहिए .
जयेश पटेल - साले मुल्ले ,,भाग यहाँ से ..
शशांक मिश्रा - साले कटुए को भगाओ यहाँ से ...खाते यहाँ की है और गाते वहाँ की है ..मारो साले को

दीपेन्द्र परमार  - सपा शायद ज्यादा सीटे ले आएगी 2014 में
राजेश चौहान - चुप साले मुल्ला-यम के पिल्ले
शशांक मिश्रा - साले मूल निवासी ..भाग यहाँ से,
हितेश राठौर - ये साला मूल निवासी नहीं अम्बेडकरिया है
राजेश चौहान - साले यहाँ भी आरक्षण मांगेगा क्या हा हा हा हा
शशांक मिश्रा - भगाओ इन हरामियो को यहाँ से।।
हितेश राठौर -जय मोदी राज , भारत माता की जय
राजेश चौहान - भारत माता की जय,,,,हिन्दू जगेगा देश जगेगा ..
जयेश पटेल - जय मोदी राज, जय जय मोदी राज

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{ छै : }

प्योर लेदर शूज  -

मेट्रो ट्रेन से  राजीव चौक पार हो चूका था ..

"' यार मुसलमानों को हिन्दुओ  की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए ..""
"" अब देख एक छोटी सी बात है,,,,जब हम लोग गाय की पूजा करते है उसे माँ मानते है .....तो साले ये लोग जान बूझ कर उसे काटते है,,,,,,अबे छोड़ नहीं सकते क्या , गाय नहीं खाओगे तो मर तो नहीं जाओगे।।""
अबे छोड़ ना यार,,,,तू भी क्या क्या सोचता रहता है ...

यार जूते बड़े सॉलिड लग रहे है,,,,,
"" हां यार कल ही खरीदे है लाजपत नगर सेन्ट्रल मार्किट से ...""
कौन सी दूकान से
"" रॉयल शूज से ख़रीदे,,,,भाई मैं तो वोही से लेता हूँ ...... " उसके जूते प्योर लेदर के होते है "
ग्रेट यार,,,मैं भी लेकर आता हूँ एक ...
"ठीक है,,,यार एक बेल्ट भी ले आना मेरे लिए .."
ओके ..

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{सात}

इनाम -


 " सुनो "
 बोलो 
"" इस बार दिवाली अच्छा गिफ्ट दे दिया तुम्हारी कंपनी ने, और बोनस भी बढ़ा के दिया है , वरना पिछले बार तो सिर्फ एक मिठाई के डिब्बे पर ही निपटा दिया था ""
 अरे देते कैसे नहीं, हमने एक महीने पहले ही बोल दिया था HR मैनेजर से, की सर इस बार सब लोग बहुत नाराज है, गिफ्ट और बोनस सही मिलना चाहिए इस बार तो ...इतना प्रेशर क्रियेट किया तभी तो मिला है।

"राम राम साब"
 राम राम"  ,,बोलो
"साब दिवाली का कुछ इनाम -विनाम मिल जाए तो बड़ी मेहरबानी होगी"
अरे लता ,,,जरा इसे कुछ दे देना यार,,,,,
"साब कुछ पैसे वैसे ,,,,??"
अबे किस बात के पैसे भाई,,,,,,,हर महीने मिलते तो है,,,अब और क्या चाहिए ..बस इसे लो और चलो आगे .
"ठीक है साब,,"

"" साले ये छोटी जात भंगी चमार कभी नहीं सुधरेंगे ,,,,भिखमंगो की तरह आ जाते है हर साल,,,इनाम दे दो ..,,इनाम दे दो ...""

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बस ...

2 टिप्‍पणियां:

  1. लिखते हो अच्छा है आप लेकिन वही पुराना पूर्वाग्रह...
    क्या केवल कोई शुक्ल या त्रिपाठी जी ही यमुना में पूजा का सामान फेंकते है? क्या कोई सिंह,श्रीवास्तव,यादव या फिर सोनकर या कोई और कास्ट नही करता क्या?
    कोई मुल्ला हिंदू लड़की पटाये तो हम गाली देते. ठीक है..क्या आप बताएँगे की कोई हिंदू अगर मुल्लाइन सेट कर ले तो ये मुल्ले क्या सोच रखते? इनका फतवे के बारे में क्यों नही लिखा? एक बार दिल्ली के जमा मस्जिद जाओ फिर गन्दगी की बात कहो आप.
    दिवाली गिफ्ट की बात करी आपने, ऐसे तो सभी अपने-२ कंपनी में मजदूरी ही करते है क्यों? कोई कंप्यूटर से करता तो कोई ईंट पत्थर से.

    मोदी के समर्थकों पे व्यंग्य किया आपने लेकिन गाँधी चापलूसो के बारे में क्या??? क्या आप खुद भी उसको विशेष परिवार मानते जिसके बारे में बोलना अपराध है. अभी तक के आपके लेखो को पढ़ के ऐसा ही लगा.

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  2. दिवाकर जी , यहाँ पर कोई पूरवाग्रह नहीं है।मैंने वोही लिखा है जो मैं रोज देखता हूँ,

    गन्दगी और इनाम - कहानी में सिर्फ समाज में जात पात और धर्म को लेकर फैले पूरवाग्रहो को दिखाया गया है, जैसे की लोग ये मान कर चलते है की सिर्फ मुसलमान और छोटी जाती के लोग ही गंदे रहते है, और ये काम सिंह,श्रीवास्तव,यादव या फिर सोनकर भी करते ही है,
    यहाँ तक की आप अलीगढ या लखनऊ की सिवल लाइन में रहने वाले मुसलमानों, जो की बाकी और मुसलमानों को उनकी गन्दगी के लिए गाली देते है ,,,,,ये कहानी उनके नजरिये को भी दर्शाती है .
    दिवाली गिफ्ट में भी आपकी बात सही है ये हर नौकरीपेशा इंसान करता है , इस कहानी का ख्याल मुझे तब आया जब मैंने आज तक के अपने नौकरीपेशा करियर में तथाकथित अच्छे खासे पैसे वालो और सवर्ण जाती के लोगो को भिखमंगो की तरह लाइन में धक्का मुक्की करते हुए दिवाली गिफ्ट लेते हुए देखा . ये कहानी भी सभी वर्गों के उअप्र व्यंग है।

    रही बात कांग्रेस की ,, मुझे अब लगता नहीं की कांग्रेस के बारे में कुछ लिखने लायक है , 50-55 साल से उन्हें देख रहे है,,,अब क्या लिखा जाए उनके बारे में .क्या मैं ये लिखू की कांग्रेस घोटाले करती है, या सब हाई कमान की चापलूसी करते है,?? आपको लगता है की ये बाते नयी है।।???

    फिर भी आपकी शिकायत मैं दूर करने की कोशिश करूँगा .

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