बुधवार, 5 दिसंबर 2012

बरबाद ईतिहास की बरबाद नस्लें !



मैं तुम्हारे इन सारे फेसबुक और सोसल साइट्स के नफरत से भरे संदेशो को सहेज लूँगा।
मैं तुम्हारे इन नफरतो से भरे  राम, अल्लाह ,हिन्दू मुस्लिम ,धरम और जात की बहस वाले सफ्हो को लोहे के पन्नो में गोद दूंगा।।।
और फेंक दूंगा उन्हें किसी दरिया की गहराई में ..... या गाढ़ दूंगा हर घर की नींव में ...

और जब आज से पांच सौ ,हजार साल बाद नयी नसलें जनम लेंगी,,,,,,
और खोदेंगी नफरत से भरी तहजीब की तहे,,,,,,,,,

तब बेनकाब हो जायेंगी तुम्हारे इतिहास की सारी हराम-गर्दियां.

मैं चाहूँगा की वो मुस्तकबिल  की नसलें जोर-जोर से हँसे तुम्हारी  बेवकूफी पर ,,,,
और फिर वो अपनी अगली नस्लों को सुनाये कहानियाँ  तुम्हारे मूर्खता की .......
और कोसें अपने माँझी  की बर्बाद नस्लों को।।।।।

2 टिप्‍पणियां:

  1. यह तो चलिए अनपढ़, अशिक्षित, अर्धशिक्षित धार्मिक कट्टरपंथियों का सामूहिक कृत्य था, पर जब देश का सर्वोच्च न्यायालय यह निर्णय सुनाये की एक कपोल कल्पित व्यक्ति का जन्मस्थान अयोध्या के विवादित ढाँचे पर हैं, तो पढ़े लिखे लोगों की मानसिकता पर तरस आता हैं। और यह हैं वह लोग जिन पर न्याय करने की भारी ज़िम्मेदारी हैं।

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  2. नहीं ऐसी बात नहीं है,,,राजसत्ता बहुत ही ज्यादा चालाक होती है .

    अपने आप को टिकाये रखने के लिए वो एक नहीं ,,,कई मोर्चो पर एक साथ लडती है।

    न्याय्लाय भी इन्ही मोर्चो में से एक है,,,,वो जानबूझ कर ऐसे मुद्ददे जनता के बीच सुलगाये रखती है जिससे की असली समस्या से ध्यान हटा रहे .......राम मंदिर का मुद्दा अभी भी जिन्दा है और उसका वक़्त आने पर फिर से इस्तेमाल होगा ,,,,
    Any way nice to see you comrade Rudra

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